भारतीय इतिहास में कुछ राजा अपनी जीत के लिए याद किए जाते हैं, और कुछ अपने चरित्र के लिए। हम्मीर देव चौहान उन्हीं महान योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने युद्ध भले ही हार दिया, लेकिन अपने स्वाभिमान, वचन और शरणागत धर्म को कभी हारने नहीं दिया। रणथम्भौर के राजा हम्मीर देव चौहान को इतिहास और लोककथाओं में “हठी हम्मीर” के नाम से याद किया जाता है। यह नाम उनकी जिद का नहीं, बल्कि उनके अडिग संकल्प का प्रतीक है। हम्मीर देव चौहान कौन थे? हम्मीर देव चौहान रणथम्भौर के चौहान शासक थे । पृथ्वीराज चौहान के बाद चौहान वंश की वीरता को फिर से जीवित करने वाले प्रमुख राजाओं में उनका नाम लिया जाता है। उनके शासनकाल में रणथम्भौर केवल एक किला नहीं था, बल्कि राजपूताना के स्वाभिमान और स्वतंत्रता का प्रतीक बन चुका था। रणथम्भौर क्यों महत्वपूर्ण था? रणथम्भौर का किला अपनी मजबूत स्थिति, ऊंची प्राचीर और रणनीतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध था। दिल्ली सल्तनत के विस्तार के समय यह किला एक बड़ी चुनौती था। जो भी शक्ति उत्तर भारत पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थी, उसके लिए रणथम्भौर को जीतना आवश्यक था। शरणागत धर्म की परीक्षा हम्मीर देव चौहान...
नरसिंहवर्मन प्रथम: वातापी का विजेता और महाबलीपुरम का रहस्य भारतीय इतिहास में कई महान योद्धा हुए, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जिनकी गाथा युद्ध, कला और रहस्य तीनों को एक साथ जोड़ती है। नरसिंहवर्मन प्रथम: वातापी का विजेता और महाबलीपुरम का रहस्य नरसिंहवर्मन प्रथम उन्हीं महान पल्लव सम्राटों में से एक थे। वे केवल एक विजेता नहीं थे। वे प्रतिशोध, रणनीति, समुद्री प्रभाव और कला संरक्षण के प्रतीक थे। उन्हें “वातापीकोंडन” यानी वातापी का विजेता कहा गया। उनकी कहानी पुलकेशिन द्वितीय से संघर्ष, वातापी विजय और महाबलीपुरम की अद्भुत कला तक फैली हुई है। पूरी वीडियो देखें: नरसिंहवर्मन प्रथम: वातापी का विजेता और महाबलीपुरम का रहस्य नरसिंहवर्मन प्रथम कौन थे? नरसिंहवर्मन प्रथम पल्लव साम्राज्य के महान शासकों में गिने जाते हैं। उन्हें “मामल्ल” भी कहा गया, जिसका अर्थ महान पहलवान माना जाता है। उनके शासनकाल में पल्लव शक्ति ने सैन्य और सांस्कृतिक दोनों क्षेत्रों में नई ऊंचाई प्राप्त की। पुलकेशिन द्वितीय से संघर्ष सातवीं शताब्दी में दक्षिण भारत में पल्लव और चालुक्य दो बड़ी शक्तियां थीं। चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्विती...