Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2026

🪔 गीता के माध्यम से मोह और कर्तव्य को समझने का मार्ग

मानव जीवन में सबसे बड़ी उलझन तब आती है जब मोह और कर्तव्य आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। ऐसे समय में श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का सच्चा मार्गदर्शक बनती है। पूज्य गुरु जी के गीता-आधारित वचनों के माध्यम से यह दिव्य प्रवचन हमें यह समझने में सहायता करता है कि मोह से ऊपर उठकर कर्तव्य के पथ पर कैसे चला जाए। 📿 इस प्रवचन में क्या जानेंगे? मोह क्या है और यह मनुष्य को कैसे बाँधता है कर्तव्य का वास्तविक अर्थ गीता के दृष्टिकोण से जीवन के कठिन निर्णयों में गीता का मार्गदर्शन आंतरिक शांति और विवेक का विकास यह प्रवचन आत्मचिंतन करने वालों और सनातन मूल्यों को समझने की इच्छा रखने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है।