भारतीय इतिहास में कई महान विजेता हुए, लेकिन सम्राट अशोक की कहानी सबसे अलग है। वे केवल इसलिए महान नहीं माने जाते कि उन्होंने विशाल मौर्य साम्राज्य पर शासन किया, बल्कि इसलिए याद किए जाते हैं क्योंकि उन्होंने युद्ध की विभीषिका देखने के बाद करुणा, धम्म और लोककल्याण को शासन का आधार बनाया। सम्राट अशोक मौर्य वंश के महान शासक थे। वे सम्राट बिंदुसार के पुत्र और चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र थे। मौर्य साम्राज्य उस समय विश्व के सबसे विशाल और संगठित साम्राज्यों में से एक माना जाता था। सम्राट अशोक: जिसने तलवार से साम्राज्य जीता और करुणा से युग जीत लिया कलिंग युद्ध: वह मोड़ जिसने अशोक को बदल दिया अशोक के जीवन का सबसे निर्णायक क्षण था कलिंग युद्ध। यह युद्ध लगभग 261 ईसा पूर्व माना जाता है। युद्ध में भयंकर जनहानि हुई। विजय तो अशोक को मिल गई, लेकिन रणभूमि पर बिखरे शव, पीड़ित परिवार और विनाश ने उनके भीतर गहरा परिवर्तन ला दिया। यही वह क्षण था जब अशोक ने स्वयं से पूछा कि यदि विजय हजारों लोगों के दुःख पर खड़ी है, तो क्या वह सच में विजय है? चंड अशोक से धम्म अशोक तक कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने युद्ध की नीति स...
भारतीय इतिहास में कुछ राजा अपनी जीत के लिए याद किए जाते हैं, और कुछ अपने चरित्र के लिए। हम्मीर देव चौहान उन्हीं महान योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने युद्ध भले ही हार दिया, लेकिन अपने स्वाभिमान, वचन और शरणागत धर्म को कभी हारने नहीं दिया। रणथम्भौर के राजा हम्मीर देव चौहान को इतिहास और लोककथाओं में “हठी हम्मीर” के नाम से याद किया जाता है। यह नाम उनकी जिद का नहीं, बल्कि उनके अडिग संकल्प का प्रतीक है। हम्मीर देव चौहान कौन थे? हम्मीर देव चौहान रणथम्भौर के चौहान शासक थे । पृथ्वीराज चौहान के बाद चौहान वंश की वीरता को फिर से जीवित करने वाले प्रमुख राजाओं में उनका नाम लिया जाता है। उनके शासनकाल में रणथम्भौर केवल एक किला नहीं था, बल्कि राजपूताना के स्वाभिमान और स्वतंत्रता का प्रतीक बन चुका था। रणथम्भौर क्यों महत्वपूर्ण था? रणथम्भौर का किला अपनी मजबूत स्थिति, ऊंची प्राचीर और रणनीतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध था। दिल्ली सल्तनत के विस्तार के समय यह किला एक बड़ी चुनौती था। जो भी शक्ति उत्तर भारत पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थी, उसके लिए रणथम्भौर को जीतना आवश्यक था। शरणागत धर्म की परीक्षा हम्मीर देव चौहान...