जन्म से टेढ़े थे… फिर भी राजा जनक को दिया ज्ञान | अष्टावक्र की सच्ची कहानी ऋषि अष्टावक्र की यह अद्भुत और प्रेरणादायक कथा हमें आत्मज्ञान, सत्य और आंतरिक शक्ति का वास्तविक अर्थ समझाती है। एक ऐसे महाज्ञानी की कहानी, जिनका शरीर जन्म से ही आठ स्थानों से वक्र था, लेकिन जिनकी बुद्धि और चेतना इतनी प्रखर थी कि उन्होंने राजाओं और विद्वानों तक को ज्ञान का सच्चा मार्ग दिखाया। बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी अष्टावक्र ने अपने पिता के वेद पाठ में त्रुटि सुधारकर यह सिद्ध कर दिया था कि सच्चा ज्ञान उम्र या रूप का मोहताज नहीं होता। पिता के शाप के कारण उनका शरीर भले ही टेढ़ा-मेढ़ा हो गया, लेकिन उनके भीतर की दिव्यता और आत्मबोध ने उन्हें महान बना दिया। जन्म से टेढ़े थे… फिर भी राजा जनक को दिया ज्ञान | अष्टावक्र की सच्ची कहानी
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग : दक्षिण का कैलाश | Shrisailam Temple 🔱 इस वीडियो में आप जानेंगे: 00:00 परिचय – दक्षिण का कैलाश क्यों? 01:10 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा 03:45 गणेश–कार्तिकेय विवाह प्रसंग और श्रीशैलम का महत्व 06:20 शक्तिपीठ के रूप में श्रीशैलम – माता पार्वती का सती रूप 08:15 चंद्रवती राजकुमारी और शिवलिंग प्रकट होने की कथा 10:30 श्रीशैलम का इतिहास – सातवाहन से लेकर विजयनगर और छत्रपति शिवाजी महाराज तक 14:00 मल्लिकार्जुन मंदिर की द्रविड़ शैली और अद्भुत वास्तुकला 17:30 महाशिवरात्रि, ब्रह्मोत्सवम और पागल अलंकारम की झलक 20:15 आज का श्रीशैलम – तीर्थ, टाइगर रिज़र्व और शांति का धाम 22:30 निष्कर्ष – मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग एक अनुभव