गीता ज्ञान: लक्ष्यहीन जीवन का कोई अस्तित्व नहीं है मनुष्य का जीवन केवल सांस लेने का नाम नहीं है। जीवन तभी सार्थक बनता है, जब उसमें उद्देश्य, दिशा और कर्तव्य का भाव हो। पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद जी महाराज के इस प्रेरणादायक गीता ज्ञान प्रवचन में जीवन के इसी गहरे सत्य को सरल भाषा में समझाया गया है। वीडियो देखें: [ VIDEO LINK ] लक्ष्यहीन जीवन क्यों निरर्थक हो जाता है? जिस जीवन में लक्ष्य नहीं होता, वह भटकाव से भर जाता है। मनुष्य अपनी ऊर्जा, समय और क्षमता को सही दिशा में नहीं लगा पाता। लक्ष्य जीवन को दिशा देता है। लक्ष्य व्यक्ति को अनुशासन, कर्म और आत्मविश्वास से जोड़ता है। गीता का संदेश भी यही है कि मनुष्य को अपने कर्तव्य को पहचानकर निरंतर कर्म करना चाहिए। बिना उद्देश्य के जीवन धीरे-धीरे उत्साह और आंतरिक शक्ति खो देता है। गीता ज्ञान और जीवन का उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक है। गीता हमें सिखाती है कि जीवन में संघर्ष आएंगे, भ्रम आएगा, मोह आएगा, लेकिन मनुष्य को अपने धर्म, कर्तव्य और लक्ष्य से विमुख नहीं होना चाहिए...
भारत माता चैनल इस देश की संस्कृति को जीवित रखने की ओर एक पहल है। हमारा प्रयास है कि भारतीय इतिहास, संस्कृति, धर्म, व वेद पुराणों का ज्ञान जन-जन तक प्रेषित करें।