भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का इतिहास केवल 1857 से शुरू नहीं होता। उससे बहुत पहले दक्षिण भारत की भूमि पर एक ऐसी रानी ने अंग्रेजों को चुनौती दी थी, जिसका नाम था रानी वेलु नाचियार।
रानी वेलु नाचियार शिवगंगा की वीर रानी थीं। पति की मृत्यु और राज्य छिन जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने रणनीति बनाई, सहयोग जुटाया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इस संघर्ष में कुयिली जैसी वीरांगना और मरुधु भाइयों जैसे योद्धाओं का योगदान इतिहास में अमर है।
कर्नाटक संधि से पहले दक्षिण भारत में हुए इस संघर्ष को समझना जरूरी है, क्योंकि यह भारत की उस वीर परंपरा को दिखाता है जिसमें मातृभूमि के लिए बलिदान सर्वोपरि था।
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